हंसगुल्ले रसगुल्ले==देवेन्द्र कुमार ==बाल गीत
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लपको
उठाओ
गप
से खा जाओ
सबसे
बचाओ
यह
है गौशाला
पहले
दूध निकाला
काली
का,
धौली का
बाद
में उबाला
छेना
निकाला
बने
चंदा से गोल
हुए
रसमय अनमोल
गोल
रसगुल्ले हंसगुल्ले
दो
तेरे दस मेरे
इसी
तरह दस फेरे
अच्छा
अच्छा
दस
तेरे सौ मेरे
इसी
तरह सौ फेरे
खाएं
खिलाएं
खाते
ही जाओ
हां, हां लाते ही जाओ
गोल
रसगुल्ले
हंसगुल्ले!
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