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Saturday, 17 March 2018

हंसती रहती झील --देवेन्द्र कुमार-- बाल गीत


हंसती रहती झील—देवेन्द्र कुमार –बाल गीत


 

सुबह दूध घुल जाता है

फिर नीला रंग आता है

कभी शांत तो कभी मचलती

रंग बदलती रहती झील

 

सखियों के संग मछली रानी

हरदम पीती रहती पानी

कमल-कुमुदिनी के फूलों में

कैसे हंसती रहती झील

 

सूरज भैया आते-जाते

थाली अपनी लाल डुबाते

चंदा के छूते ही देखो

चांदी की बन जाती झील

 

बादल अपने कपड़े धोते

बत्तख-हंस तैरते रहते

आसमान हरदम मुंह देखे

कितना सुंदर दरपन झील!

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