जादूगरनी—बाल गीत—देवेन्द्र कुमार
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सूरज
डूबा हुआ अंधेरा
जादूगरनी आई
चूनर ओढ़ सितारों वाली
कैसे है मुसकाई
माथे पर चंदा की बिंदी
उससे झर झर झरे चांदनी
नदियां, पोखर
हैं चांदी के
जादू-- छड़ी घुमाई
पीछे पीछे नींद उतरती
आंखों में है सपने भरती
काम थके आराम करें हम
वाह क्या रात बनाई।====
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