Sunday, 2 February 2020

बेच रहे गुब्बारे- बाल गीत-देवेन्द्र कुमार


बेच रहे गुब्बारे—बाल गीत—देवेन्द्र कुमार

=============

बच्चे बेच रहे गुब्बारे

रंग-बिरंगे प्यारे प्यारे

फटे पुराने कपड़े पहने

कौन नए सिलवाएगा

 

सब बच्चे पढ़ने जाते हैं

छुट्टी हो तो घर आते हैं

ये क्यों सड़कों पर रहते हैं

कौन हमें समझाएगा

 

ऐसे बच्चे कितने सारे

बेघर हैं पर फिर भी प्यारे

इनका बचपन किसने छीना

कौन इन्हें बतलाएगा

 

कुछ सड़कों पर कुछ ढाबों में

घर में नौकर, कुछ खेतों में

पुस्तक, खेल, खिलौने गायब

वापस कौन दिलाएगा

 

क्यों न हम सब मिलकर सोचें

ये क्यों अपना बचपन बेचें

कहां छिपी हैं इनकी खुशियां

कौन खोजकर लाएगा

==================

 

 

Wednesday, 18 December 2019

अजब आज मौसम--बाल गीत--देवेन्द्र कुमार


अजब आज मौसम—बाल गीत—देवेन्द्र कुमार


=============
 

हैं कुहरा नदी पर

या उतरे हैं बादल

 
                                                           

है रूई का परदा

दिखाई न देता

वह बैठा है मांझी

नहीं नाव खेता

अजब आज मौसम

लगें एक जल-थल

 
 

बहुत ठंड भाई

रजाई निकालो

पखेरू ठिठुरते

उन्हें भी बुला लो

करें आज छुट्टी

किताबें पढ़ें कल

 
 
 


हवा है बरफ सी

चलो सिर बचाओ

अंगीठी गरम है

यहीं बैठ जाओ

रसोई में मम्मी

पकौड़े रही तल

============

Friday, 22 March 2019

कूड़े वाला भैया--बाल गीत--देवेन्द्र कुमार


कूड़े वाला भैया==देवेन्द्र कुमार==बाल गीत

 

कूड़े वाला भैया आए

‘कूड़ा दो’- आवाज लगाए
 

झाड़ू से कूड़े को मारे

साफ-सफाई को पुचकारे

कोने कोने को चमकाकर

खुशबू का संदेश सुनाए
 

ऊपर नीचे दौड़ लगाता

रखें सफाई यह समझाता

उसका काम बहुत भारी है

आओ हम भी हाथ बंटाएं
 

दिखता है मैला ऊपर से

पर कितना उजला अंदर से

जहां जहां भी कूड़ा देखे

उसे कैद की सजा सुनाए
 

कूड़े वाला भैया आये

====================

Monday, 18 February 2019

अपना रमिया--बाल गीत--देवेंद कुमार


अपना रमिया—बाल गीत—देवेन्द्रकुमार

===============

अपना रमिया गूंगा है

फिर भी कुछ-कुछ कहता है

शोर बहुत उसकी चुप्पी में

सुनो सुनो क्या कहता है
 

जब भी देखो हंसता रहता

उसका हंसना मीठा है

होंठ नहीं आंखें बोलें

समझो वह क्या कहता है
 

लट्टू सा घूमे घर भर में

पैर नहीं जैसे पहिए

बिना थके सब करता जाए

बड़के भैया जैसा है।

================

Saturday, 9 February 2019

जादूगरनी--बाल गीत--देवेन्द्र कुमार


जादूगरनी—बाल गीत—देवेन्द्र कुमार

          ==  

सूरज डूबा हुआ अंधेरा

जादूगरनी आई

चूनर ओढ़ सितारों  वाली

कैसे है मुसकाई

 

माथे पर चंदा की बिंदी

उससे झर झर झरे चांदनी

नदियां, पोखर हैं चांदी के

जादू-- छड़ी घुमाई

 

पीछे पीछे नींद उतरती

आंखों में है सपने भरती

काम थके आराम करें हम

वाह क्या रात बनाई।====

 

Monday, 4 February 2019

गजब मिठाई-बाल गीत-देवेन्द्र कुमार


गजब मिठाई—बाल गीत—देवेन्द्र कुमार

============

पापा थैले में कुछ लाए

बोले-यह है नई मिठाई
 

ना रसगुल्ले, ना यह बरफी

बालूशाही, नहीं इमरती

हलवाई से दूर रहे यह

ऐसी है यह अजब मिठाई
 

मैंने पूछा नाम बताओ

मां बोलीं-आंखों से खाओ

जल्दी से जो थैला खोला

हमें मिली क्या खूब मिठाई
 

दो नाटक और बीस कथाएं

कुछ पन्नों ने गीत सुनाए

पढ़कर मैं पापा से बोला

आंखें मांगें और मिठाई
 

मम्मी ने हंस कर समझाया    

छक कर खाओ गजब मिठाई

===============

हंसगुल्ले रसगुल्ल-बाल गीत-देवेन्द्र कुमार


हंसगुल्ले  रसगुल्ले==देवेन्द्र कुमार ==बाल गीत

============ 

 

लपको उठाओ

गप से खा जाओ

सबसे बचाओ
 
 

यह है गौशाला

पहले दूध निकाला

काली का, धौली का

बाद में उबाला

छेना निकाला

बने चंदा से गोल

हुए रसमय अनमोल

गोल रसगुल्ले हंसगुल्ले

 

दो तेरे दस मेरे

इसी तरह दस फेरे

अच्छा अच्छा

दस तेरे सौ मेरे

इसी तरह सौ फेरे

खाएं खिलाएं

खाते ही जाओ

हां, हां लाते ही जाओ

गोल रसगुल्ले

हंसगुल्ले!

============