दिल्ली के रिक्शावाले—बाल गीत—देवेन्द्र कुमार
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घर बंगाल, बिहार, उड़ीसा
उधर हिमाचल, मध्य
प्रदेश
दूर दूर से चलकर आए
ये दिल्ली के रिक्शावाले
पहियों के संग पहिए बनकर
सारा दिन हैं पैर घुमाते
मेहनत पीते, मेहनत
खाते
ये दिल्ली के रिक्शावाले
सर्दी में भी बहे पसीना
कैसा मुश्किल जीवन जीना
सच्चे, अच्छे परदेसी हैं
ये दिल्ली के रिक्शावाले
मुनिया, बाबा, अम्मां, भैया
सबको भूल चले आए हैं
न जाने कब वापस जाएं
ये दिल्ली के रिक्शावाले
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