बूढ़ा बरगद: बूढ़े
बाबा—बाल गीत-देवेन्द्र
कुमार
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बरगद पर हैं कई घोंसले
जाने कितने पंछी रहते
हम पर बाबाजी की छाया
भाग्यवान हमको सब कहते
दाढ़ी श्वेत धवल बाबा की
लटक रही बरगद की मूंछें
अपनी हर मुश्किल का हल हम
जा कर बाबाजी से पूछें
प्यार, हंसी, गुस्से की गरमी
ये रंग बाबा रोज दिखाते
बरगद की छाया में बच्चे
खूब खेलते शोर मचाते
सांझ ढले बरगद के नीचे
अपने बाबा दीप जलाते
हम सबकी फरमाइश पर फिर
सरस कथाएं रोज सुनाते
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