कच्ची नींद-पक्की नींद—बाल गीत -–देवेन्द्र कुमार
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कितनी कच्ची मां की नींद
हौले से जो कोई बोले
भूले से भी बत्ती खोले
झट उठकर सब पर चिल्लाएं
चुरमुर पापड़ उनकी नींद
पापाजी की पक्की नींद
चाहे सिर पर बजें नगाड़े
ठुक ठुक कोई कीलें गाड़े
खुर खुर खुर खुर करते रहते
कैसी चिप्पक उनकी नींद
अपनी खेल खिलाड़ी नींद
पढ़ते पढ़ते हम सो जाते
सब जब सोते हम उठ जाते
सुबह सवेरे कान पकड़कर
घर से भागे नटखट नींद
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