गपोड़शंख
पेड़ों
को पैर दूंग
फूलों
को पंख
और
क्या करूं बोलो
मैं
हूं गपोड़शंख
बस्ते
से भाग गई
मुश्किल
पढ़ाई
इसमें
रख दिए मैंने
खेल-कूद
भाई
मम्मीजी
कहती हैं
मुझको
गपोड़ी
इसमें
भी गप्प
मिली है थोड़ी-थोड़ी
कैसी
कही कैसी रही
सच
कहना भाई
हम
सबने खाई जो
गप्प
की मिठाई।
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