चूहा किताबें....बाल गीत—देवेन्द्र कुमार
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चूहा किताबें पढ़ता है
पढ़ते पढ़ते खाता है
जाने किसे सुनाता है
हर पुस्तक पर चढ़ता है
चूहा किताबें पढ़ता है
अभी भगाया, झट
फिर आया
इसने शब्दकोश है खाया
ज्ञान इसी से बढ़ता है
चूहा किताबें पढ़ता है
बार-बार पिंजरा लगवाया
फिर भी चंगुल में न आया
मेरा पारा चढ़ता है
चूहा किताबें पढ़ता है।
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