गड़बड़झाला—बाल गीत—देवेन्द्र
कुमार
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आसमान को हरा बना दें
धरती नीली पेड़ बैंगनी
सागर मीठा चंदा काला
फिर क्या होगा
-गड़बड़झाला!
दादा मांगें दांत हमारे
रसगुल्ले हों खूब करारे
चाबी अंदर बाहर ताला
फिर क्या होगा
-गड़बड़झाला!
दूध गिरे बादल से भाई
तालाबों में पड़ी मलाई
मक्खी बुनती मकड़ी जाला
फिर क्या होगा
-गड़बड़झाला!
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