Sunday, 9 December 2018

गड़बड़झाला--बाल गीत--देवेन्द्र कुमार


गड़बड़झालाबाल गीत—देवेन्द्र कुमार


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आसमान को हरा बना दें

धरती नीली पेड़ बैंगनी

सागर मीठा चंदा काला

फिर क्या होगा

-गड़बड़झाला!

 
दादा मांगें दांत हमारे

रसगुल्ले हों खूब करारे

चाबी अंदर बाहर ताला

फिर क्या होगा

-गड़बड़झाला!

दूध गिरे बादल से भाई

तालाबों में पड़ी मलाई

मक्खी बुनती मकड़ी जाला

फिर क्या होगा

-गड़बड़झाला!

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