Saturday, 1 December 2018

मम्मी का जाड़ा --बाल गीत --देवेन्द्र कुमार


मम्मी का जाड़ा==देवेन्द्र कुमार ==बाल गीत


 

कैसा जाड़ा मम्मी का

खुद नल पर कपड़े धोती है

मुझे कहे तू ओढ़ रजाई

 

कैसा गुस्सा मम्मी का

मुझे मारकर खुद रोती है

बिना बात फिर मिले मिठाई

 

कैसी रोटी मम्मी की

खाते जाओ, खाते जाओ

दुगनी इसने भूख जगाई

=============== 

Thursday, 29 November 2018

कुछ कुछ से कुछ कुछ--बाल गीत-- देवेन्द्र कुमार


कुछ कुछ से कुछ कुछ—बाल गीत—देवेंद्र कुमार


 

कुछ कुछ से कुछ कुछ करते हैं हम

तुम भी कुछ लाओ यह कुछ है कम

 

कैसा भी मौसम हो आओ हम गाएं

जो रहते दूर-दूर उन्हें पास लाएं

प्यास बहुत सारी और पानी है कम

कुछ कुछ से कुछ कुछ करते हैं हम

 

कितना भी गुस्सा हो हंस दो जरा सा

खाली घड़ा भी लगे भरा भरा सा

लड़ना लड़ाई से जब तक है दम

कुछ कुछ से कुछ कुछ करते हैं हम

 

तू मेरा, मैं तेरा सब सबके कैसे

बस रस में डूबे हों रसगुल्ले जैसे

बांटो और खाओ होंगे ना कम

कुछ कुछ से कुछ कुछ करते हैं हम

=======================

Sunday, 25 November 2018

जन्म दिवस का गुलदस्ता--बाल गीत--देवेन्द्र कुमार


जन्मदिवस का गुलदस्ता---बाल गीत—देवेन्द्र कुमार
============== 

 

या तो सबका साथ मनाएं

या फिर रोज मनाएं हम

जन्मदिवस का गुलदस्ता जी

एक बड़ा बनवाएं हम

 

जन्मदिवस मेरे बस्ते का

भालू का, मेरी गुडि़या का

कैरम का, कम्प्यूटर जी का

सबका यहीं मनाएं हम

 

बोलो कभी मना है ऐसा

मेरा जन्मदिवस है जैसा

पूरा शहर बुलाएं हम

नाचें, धूम मचाएं हम
==============
=============

 

 

Saturday, 24 November 2018

डगमग डोले --बाल गीत --देवेन्द्र कुमार


डगमग डोले—देवेन्द्र कुमार –बाल गीत

============

छोटी नैया डगमग डोले

मां की कथा कहानी में

 

मांझी ने अब नाव चलाई

नदिया ने भी लहर उठाई

नाव नदी का साथ पुराना

जैसे मछली पानी मे
दादीजी झट उठकर आईं

नई कहानी तुरत बनाई

बोली-हमें बुलाया बच्चो

परियों की महारानी ने
 

सुनते-सुनते आंखें भारी

भूल गए हम बातें सारी

ना परियां ना जादू-टोना

भैंस गई लो पानी में
 

छोटी नैया डगमग डोले

मां की कथा कहानी में

=============

Thursday, 31 May 2018

सारे फूल झरे --देवेन्द्र कुमार --बाल गीत


सारे फूल झरे—देवेन्द्र कुमार –बाल गीत


------------------------------------------

पत्ते धूल भरे

देखो छांह डरे

 

मौसम करता छल

चैन नहीं इक पल

धरती सूख गई

सारे फूल झरे

 

क्या दिन क्या रातें

गर्मी की बातें

सूरज का गुस्सा

क्या क्या जुल्म करे

 

ठंड कहां बैठी

गरमी है ऐंठी

बादल आ जाएं

तब हों प्राण हरे

 

तन पर बर्फ मलो

घर से निकल चलो

पंखे बंद हुए

बिजली खेल करे

===============

=============== 

Monday, 28 May 2018

मक्खी सब डूब मरें --देवेन्द्र कुमार --बाल गीत


मक्खी सब डूब मरें—देवेन्द्र कुमार—बाल गीत

------------------------------

भोजन को मक्खी से

दूर-दूर रखना
 

मक्खी तो कूड़े पर

भिन-भिनभिनाए

गंदा कर पैरों को

फिर घर में आए
 

रोग बहुत सारे

मक्खी में रहते

इससे बचकर रहना

बाबा यों कहते
 

कूड़ा न फैले

ठहरे न पानी

तभी खत्म होगी

यह गंदी कहानी
 

बागों में फूल हंसें

तितलियां बुलाएं

मक्खी सब डूब मरें

हम गुनगुनाएं।

==========

Wednesday, 23 May 2018

अगर कुँए में --देवेन्द्र कुमार --बाल गीत


अगर कुएं में—देवेन्द्र कुमार –बाल गीत

====================

-गरम गरम मौसम में गरमी

अगर कुएं में रहने जाए

तब तो भैया बड़ा मजा हो

वह तो चौबीस घंटे नहाए

 

पानी के अंदर रहने से

उसको होगा खूब जुकाम

छींक छींक कर थक जाएगी

सो जाएगी चादर तान

 

अब आएगी छम छम बारिश

सूखे के पकड़ेगी कान                     

हरियाली का खेल चलेगा

खेतों का होगा स्नान

 

लुढकम पकडम मस्ती होगी

बारिश माँ से यों बोलेगी

तुम भी घर से बाहर आओ

बचपन की तस्वीर दिखाओ

 

माँ बोलेगी सुन री बहना

जा बच्चों से इतना कहना

भीग चुके अब तो घर जाओ

गरम पकोड़े ,हलवा खाओ

===================